Two Men Caught Trying to Meet Gangster Neeraj Bawania at Delhi Hospital

कभी ‘दिल्ली का दाऊद’ कहे जाने वाले कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवानिया को देखने की चाहत में दो युवक सीधे अस्पताल पहुंच गए, जहां उसे कस्टडी परोल के दौरान लाया गया था। यह घटना न केवल दिल्ली पुलिस को सतर्क कर गई, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अपराधी किस तरह समाज के कुछ वर्गों को प्रभावित कर रहे हैं।

कस्टडी परोल पर अस्पताल पहुंचा नीरज बवानिया

गैंगस्टर नीरज बवानिया वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद है और उस पर कई संगीन अपराधों का आरोप है। मंगलवार को उसे दिल्ली हाई कोर्ट की अनुमति के बाद छह घंटे की कस्टडी परोल पर शादीपुर स्थित नारायणा रोड के आरएलकेसी अस्पताल एंड मेट्रो हार्ट इंस्टिट्यूट लाया गया। उसका मकसद था अपनी बीमार पत्नी से मुलाकात करना, जो कि उसी अस्पताल में भर्ती है।

कोर्ट ने उसे सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक की विशेष अनुमति दी थी। इस दौरान उसकी सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस और स्पेशल सेल ने मिलकर सख्त इंतजाम किए थे। पुलिस की थर्ड बटालियन ने उसे कड़ी निगरानी में अस्पताल पहुँचाया।

दो युवकों की संदिग्ध हरकत से पुलिस सतर्क

जैसे ही नीरज बवानिया अस्पताल पहुंचा, करीब दोपहर 2:15 बजे, अस्पताल के स्टाफ की नजर दो युवकों पर पड़ी जो परिसर में संदिग्ध रूप से घूम रहे थे। उनकी गतिविधियों को लेकर स्टाफ को शक हुआ और उन्होंने तुरंत वहां तैनात पुलिस को इसकी जानकारी दी। बिना देरी किए, स्पेशल सेल की टीम ने दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया।

पूछताछ में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

हिरासत में लिए गए दोनों युवकों की पहचान हुई है –

  • प्रवीण यादव (36 वर्ष)

  • नीरज यादव (32 वर्ष)
    — दोनों हैदरपुर गांव के निवासी बताए गए हैं।

प्रारंभिक जांच में जब पुलिस ने उनके मोबाइल फोन की छानबीन की, तो कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली। हालांकि, युवकों के इरादे को लेकर शंका बनी रही। जब उनसे कड़ी पूछताछ की गई, तो उन्होंने खुलासा किया कि वे नीरज बवानिया से बेहद प्रभावित हैं और उसे रियल लाइफ में देखना चाहते थे। जैसे ही उन्हें खबर मिली कि बवानिया को अस्पताल लाया जा रहा है, वे उसे देखने पहुंच गए।

नीरज बवानिया: दिल्ली के कुख्यात अपराधियों में शुमार

नीरज बवानिया का नाम दिल्ली के सबसे खतरनाक अपराधियों में लिया जाता है। उसकी गिनती राजधानी की गैंगवॉर संस्कृति में एक बड़ा चेहरा बनने के रूप में होती है। हत्या, अपहरण, फिरौती, हथियार तस्करी और गैंगवॉर जैसे मामलों में उसका नाम दर्ज है। वह 2015 से जेल में बंद है, जब उसे पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत गिरफ्तार किया था।

दिल्ली की सड़कों पर गैंगवार के जिस दौर ने खौफ फैला रखा था, उसमें नीरज बवानिया का नाम सबसे ऊपर आता था। कई बार उसने पुलिस को चुनौती दी, और कई बार उसकी गैंग के लोग पुलिस मुठभेड़ में मारे भी गए। बावजूद इसके, उसकी छवि कुछ युवाओं के लिए “रॉबिनहुड टाइप” अपराधी की बन गई है – जो कि एक बेहद चिंताजनक सामाजिक संकेत है।

युवाओं का अपराधियों से प्रभावित होना – चिंता की बात

इस घटना ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है – क्या आज की युवा पीढ़ी अपराधियों को हीरो समझने लगी है?
दोनों युवक किसी अपराध में संलिप्त नहीं पाए गए, न ही उनके रिकॉर्ड में कोई आपत्तिजनक जानकारी थी। लेकिन उनका नीरज बवानिया जैसे गैंगस्टर को फॉलो करना और उसे देखने की ख्वाहिश, समाज के मानसिक और नैतिक ढांचे को लेकर सवाल खड़े करता है।

अपराध की ग्लैमरस छवि बनाना घातक

सिनेमा, सोशल मीडिया और न्यूज कवरेज की वजह से अपराधियों की छवि कई बार ग्लैमरस बन जाती है। उनके जीवन को ‘स्टाइलिश’ दिखाया जाता है – जैसे वे कोई सेलिब्रिटी हों। नीरज बवानिया जैसे अपराधी जब कोर्ट या अस्पताल लाए जाते हैं, तो कुछ लोग उन्हें देखने की इच्छा रखने लगते हैं – जैसे वे किसी स्टार से मिल रहे हों। यह मानसिकता सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरनाक हो सकती है।

पुलिस की सतर्कता और तेज कार्रवाई

दिल्ली पुलिस और स्पेशल सेल की त्वरित कार्रवाई से यह बात साफ है कि सुरक्षा में कोई चूक नहीं होने दी गई। दोनों युवकों को समय रहते पकड़ लिया गया और उनकी पूरी जांच-पड़ताल की गई। जांच में फिलहाल कोई आपराधिक गतिविधि या साजिश सामने नहीं आई है, लेकिन लोकल पुलिस को दोनों का रिकॉर्ड खंगालने के लिए सौंप दिया गया है

अस्पताल परिसर में सुरक्षा बढ़ी

घटना के बाद अस्पताल परिसर में सुरक्षा को और कड़ा कर दिया गया है। जो लोग भी अस्पताल में दाखिल हो रहे हैं, उनकी पहचान की जा रही है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन भी इस पूरे मामले को लेकर अलर्ट हो गया है।

क्या कहती है समाजशास्त्रियों की राय?

विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में अपराधियों को लेकर आकर्षण बढ़ना मीडिया और डिजिटल प्रभाव का नतीजा हो सकता है।
डॉ. सीमा त्रिपाठी, एक समाजशास्त्री कहती हैं –

“जब अपराधी युवाओं के रोल मॉडल बन जाते हैं, तो ये समाज के नैतिक पतन का संकेत होता है। हमें स्कूलों और कॉलेजों में अपराध और कानून को लेकर जागरूकता बढ़ानी होगी।”

समाधान की दिशा में क्या किया जा सकता है?

  1. शिक्षा व्यवस्था में नैतिक शिक्षा को मजबूती देना।

  2. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी और जिम्मेदार रिपोर्टिंग।

  3. मीडिया को अपराधियों की छवि को ग्लैमराइज करने से बचना चाहिए।

  4. युवाओं के बीच रियल हीरोज़ जैसे शिक्षक, वैज्ञानिक, डॉक्टर और सुरक्षाकर्मी को प्रमोट करना।

आखरी सुझाव

यह घटना एक चेतावनी है – न केवल पुलिस और प्रशासन के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए।
जिस तरह से दो सामान्य युवक एक कुख्यात गैंगस्टर से मिलने अस्पताल पहुंच गए, यह बताता है कि अपराधी अब भी कुछ लोगों की नजरों में “हैसियत” रखते हैं। हमें यह तय करना होगा कि हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है – और उस दिशा को सही करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

अगर आपको यह लेख जानकारीपूर्ण लगा हो, तो कृपया इसे शेयर करें ताकि समाज में अपराध के प्रति गलत आकर्षण को रोका जा सके।

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