पटना स्ट्रीट से राजनीति तक की यात्रा
इस साल अप्रैल में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी त्रिनिदाद एवं टोबैगो पहुँचे, तो वहां का दृश्य लगभग वैसा ही था जैसा बिहारियों की कल्पना में बसता है। पटना स्ट्रीट नामक एक रोड से लेकर भोजपुरी चौताल की पर्यायवाची लय, ढोल की गूंज और रंग-बिरंगे भारतीय परिधानों में सजी-धजी एक भव्य स्वागत सभा: ये सब उस दिन की सांस्कृतिक महफिल की एक झलक भर थी।
बिहार चुनावों के अंतर्गत केन्द्रीय मान्यता प्राप्त दलों के भीतर एक रणनीतिक दोहरी पैंतरे – विदेशी पृष्ठभूमि में भारतीय पहचान की गूंज और राजनैतिक रैलियों के जरिए घर-घर तक संदेश पहुँचाने – की दस्तक थी। यह न केवल सजावटी स्वागत था, बल्कि दूर दराज बसे प्रवासी बिहारियों के एकता-बोध और उन्हें समर्थन के लिए भावनात्मक तौर पर जोड़ने की एक सूझबूझ भरी राजनीतिक चाल भी थी।
🎶 भोजपुरी चौताल और भारतीय पहनावे
प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर बिहार-उत्तर प्रदेश से निकले भोजपुरी भाषी पूर्वजों के पीछे छूटी परम्पराओं को जीवित रखना चाहते थे। प्रधानमंत्री का स्वागत भोजपुरिया ठाठ-बाट, चौताल (लोकगीत शैली), ढोल और पारंपरिक परिधानों के साथ किया गया, जिससे यह उत्सव महज एक राजनैतिक आयोजन न रहकर एक सांस्कृतिक मिलन जैसा प्रतीत हुआ।
यह समारोह न केवल मोदी को समर्पित था, बल्कि बिहार की पहचान, भाषा, संस्कृति और मूल्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का प्रतीक था।
🏮 पटना स्ट्रीट: दूरी के बावजूद सामंजस्य
त्रिनिदाद एवं टोबैगो की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन स्थित ‘पटना स्ट्रीट’ – अभिनीत नाम – ने एक प्रतीकात्मक पुल स्थापित किया। मोदी के भाषण में इसका ज़िक्र एक सजीव उदाहरण रूप आया। उन्होंने कहा:
“बनारस, पटना, कोलकाता, दिल्ली भले ही भारत के शहर हों, लेकिन यहाँ सड़कों के नाम भी उन्हीं के हैं।”
इससे संदेश स्पष्ट था: भारत और उसकी संस्कृति का प्रभाव केवल परिधि तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी उसका आत्मीय रूप से स्वागत किया जाता है।
👩 ‘बिहार की बेटी’ – कमला प्रसाद बिसेसर की पहचान
मोदी ने त्रिनिदाद की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर को दिल से “बिहार की बेटी” बताया। पहला महिला प्रधानमंत्री बनने वाली कमला जी की पैतृक जड़ें बिहार के बक्सर जिले से निकलती हैं। उनके पूर्वज, राम लखन मिश्रा, 1889 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में त्रिनिदाद गए थे।
मोदी ने कहा:
“प्रधानमंत्री कमला के पूर्वज बिहार के बक्सर से थे… लोग उन्हें बिहार की बेटी मानते हैं।”
इस प्रस्तावना के जरिए मोदी बिहार की महिला मतदाताओं को एक संवेदनशील संदेश देना चाहते थे – यह दिखाने का प्रयास कि वैश्विक राजनीति में भी बिहार की पहचान और उससे निकले लोग किसी प्रशंसा से कम नहीं।
🌾 बिहार की विरासत: विश्व गौरव
मोदी ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक, राजनैतिक और कूटनीतिक विरासत को व्यापक स्तर पर उजागर किया। उनका प्रमुख संदेश था कि बिहार:
- सदियों से लोकतंत्र व राजनीति के क्षेत्र में अग्रणी रहा है।
- कूटनीति और सामाजिक बहुलता के दृष्टिकोण से वैश्विक योगदान देता रहा है।
- आने वाली 21वीं शताब्दी में बिहार से नवोन्मेषी और विकासात्मक अवसर उत्पन्न होंगे।
उन्होंने सामुदायिक सभा में कहा:
“बिहार की विरासत भारत और दुनिया का गौरव है… 21वीं सदी में बिहार से नए अवसर सामने आएंगे।”
सीधे-सीधे संदेश यह था: बिहार सिर्फ भारत का नहीं, बल्कि विश्व का गौरव है।
🌍 प्रवासी भारतीयों की योग्य होड़
मोदी ने त्रिनिदाद एवं टोबैगो स्थित भारतीय समुदाय की गहराई से प्रशंसा की। उनके वक्तव्य में भावनात्मक जुड़ाव और स्वाभिमान की झलक थी:
“उन्होंने अपनी धरती छोड़ी, लेकिन अपनी आत्मा नहीं…”
“वे सिर्फ प्रवासी नहीं थे, वे एक शाश्वत सभ्यता के संदेशवाहक थे।”
यह ऐसा बयान था जिसमें न केवल पूर्वजो के संघर्षों को स्वीकारा गया, बल्कि उन्हें आधुनिक भारत के वैश्विक दूत के रूप में भी स्थान दिया गया।
🛂 ओसीआई कार्ड – प्रवासियों को राष्ट्र से जोड़ते कदम
मोदी ने वहां यह घोषणा भी की कि अब प्रवासी भारतीयों की छठी पीढ़ी भी ओवरसीज़ सिटिजनशिप ऑफ़ इंडिया (OCI) कार्ड पाने की पात्र हो जाएगी। इसका सीधा प्रभाव मिलेगा:
- उन्हें भारत आने, रहने, पढ़ने और व्यवसाय करने का अधिकार मिलेगा।
- छठी पीढ़ी तक OCI सुविधा से उनके संबंध भारत के साथ मजबूत होंगे।
- यह प्रवासी भारतीयों को वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान और उससे जुड़े रहने का संवैधानिक अवसर प्रदान करता है।
इससे यह संकेत भी आया कि मोदी सरकार विदेशी धरती पर बसे भारतीय व उनकी आगामी पीढ़ियों को सक्रिय तौर पर जोड़ने के इच्छुक है।
🗳️ बिहार चुनावी रणनीति की सूक्ष्मता
चुनाव कुछ महीनों दूर थे, और मोदी की यह यात्रा रणनीतिक रूप से बिहार की जनता को संदेश भेजने का एक अच्छा अवसर था:
- संस्कृति और आत्मीयता: बिहारी प्रवासियों के दिलों को छूने का प्रयास।
- ग्लोबल पहचान: विदेशी धरती में भारतीय पहचान की रक्षा संदेश के माध्यम से।
- वंशानुक्रम से प्रेरणा: कमला और राम लखन जैसे बिहार से जुड़े व्यक्ति आंदोलन की विरासत के प्रतीक।
- आगे की राह: युवा पीढ़ियों के लिए सुनहरा मौका, जैसे ओसीआई विस्तार।
बिहार के मतदाताओं के लिए यह संदेश था कि “हम आपको भूल नहीं रहे, आपके गर्व की दुनिया तक कद बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।”
✨ भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव का महत्व
यह दृश्य सिर्फ भव्यता नहीं था, बल्कि भावनाओं की प्रतिक्रिया थी। जब मोदी भोजपुरी थाप पर नाचते गीतों के बीच वाद-विवाद में प्रवेश करते तो ऐसा लगता जैसे बिहार ही वहाँ बैठा हो। यह जुड़ाव चुनावी माहौल में इकता का सूचक था।
🎯 सारांश – क्या हुई यह यात्रा?
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| स्थान | त्रिनिदाद और टोबैगो, पटना स्ट्रीट, पोर्ट ऑफ स्पेन |
| मुख्य आकर्षण | भोजपुरी संस्कृति, लोकगीत, चौताल, ढोल |
| राजनीतिक संदेश | Bihar-सापेक्ष पहचान, वैश्विक पहचान, चुनावी तिलांजलि |
| प्रमुख वक्तव्य | कमला प्रसाद को ‘बिहार की बेटी’, बिहार की विरासत की महत्ता |
| सुविधा घोषणा | छठी पीढ़ी की OCI पात्रता |
📌बिहार से शुरु होकर विश्व तक
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सिर्फ विदेश यात्रा नहीं थी – यह भावनात्मक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और संवैधानिक हर पहलू को एक साथ जोड़ने की कोशिश थी। जब बिहार की मिट्टी से जुड़े लोग अंतरराष्ट्रीय मंच पर गर्व और आत्मीयता से भारत की पहचान को पुनः स्थापित करते हैं, तो मात्र शक्ति का उपयोग न होकर, पहचान, भावनात्मक जुड़ाव और नए अवसरों की भावना जगती है।
यह ब्लॉग लेख उस यात्रा की एक रंगीन, आत्मीय और विस्तृत झलक है। आशा है, यह पठनीय और जानकारीपूर्ण रहा होगा।