Maratha Military Forts of India Added to UNESCO World Heritage List

2025 की जुलाई में पेरिस में आयोजित UNESCO की 47वीं वर्ल्ड हेरीटेज समिति की बैठक में “Maratha Military Landscapes of India” को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यह भारत की 44वीं विश्व धरोहर संपत्ति बन गई, जिसने एक बार फिर हमारे सशक्त ऐतिहासिक-सांस्कृतिक धरोहर की वैश्विक पहचान को नयी ऊंचाई पर पहुंचाया है (The New Indian Express)।

इस उपलब्धि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित समूचे भारत की जनता ने खुशी-खुशी हिस्सा लिया। उन्होंने इस निर्णय का स्वागत करते हुए देशवासियों को इस ऐतिहासिक श्रृंखला की यात्रा करने का आग्रह भी किया ।

1. यह विरासत क्यों विशेष है?

1.1 सैन्य रणनीति और वास्तुकला का मौलिक संयोजन

17वीं से 19वीं शताब्दी के दौरान मराठा साम्राज्य ने विभिन्न terrains जैसे पहाड़ी, वन-घने क्षेत्र, पठार, तटीय और द्वीपीय इलाकों में गढ़ों का एक सशक्त नेटवर्क तैयार किया। ये मात्र गढ़ नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से तैयार किए गए महत्वपूर्ण सामरिक केंद्र थे, जो प्राकृतिक स्थिति और डिफेंस योजनाओं के सर्वोत्तम समन्वय का परिचय देते थे ।

1.2 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

मराठा साम्राज्य की स्थापना और विस्तार में इन गढ़ों ने प्रमुख भूमिका निभाई—चाहे वह छत्रपति शिवाजी महाराज का समय हो या पेशवा काल। ये गढ़ न केवल युद्ध के समय सुरक्षित ठिकाना थे, बल्कि साम्राज्य के प्रशासनिक, धार्मिक और सामाजिक केंद्र भी थे ।

इसके अलावा, ये गढ़ आज भी लाखों श्रद्धालुओं, पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए बेहद आकर्षक हैं।

2. 12 गढ़: एक व्यापक भू-आधारित नेटवर्क

2.1 महाराष्ट्र की 11 गढ़

  1. सालेहर (Salher) – पहाड़ी गढ़
  2. शिवनेरी (Shivneri) – पहाड़ी गढ़
  3. लोहगड (Lohgad) – पहाड़ी गढ़
  4. खंडेरी (Khanderi) – द्वीपीय गढ़
  5. रायगड (Raigad) – पहाड़ी गढ़
  6. राजगड (Rajgad) – पहाड़ी गढ़
  7. प्रतापगड (Pratapgad) – पहाड़-वन गढ़
  8. सुवर्णदुर्ग (Suvarnadurg) – द्वीपीय गढ़
  9. पन्हाला (Panhala) – पठार-गिरि गढ़
  10. विजयदुर्ग (Vijaydurg) – तटीय गढ़
  11. सिंहदुर्ग (Sindhudurg) – द्वीपीय गढ़

2.2 तमिलनाडु में गिंजी (Gingee Fort)

  1. गिंजी किला – पहाड़ी गढ़, जो तमिलनाडु की कठोर भौगोलिक स्थिति में स्थित है (The New Indian Express, News on Air)।

2.3 संरक्षित एजेंसियां

  • ASI (Archaeological Survey of India) द्वारा संरक्षित नौ गढ़: शिवनेरी, लोहगड, रायगड, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग, सिंहदुर्ग, तथा गिंजी ।
  • महाराष्ट्र शासन के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग द्वारा संरक्षित चार गढ़: सालेहर, राजगड, खांदेरी, प्रतापगड (DD India)।

3. UNESCO नामांकन की प्रक्रिया

  • जनवरी 2024: भारत ने इन गढ़ों को UNESCO वर्ल्ड हेरीटेज लिस्ट के लिए अपने 2024‑25 चक्र की आधिकारिक नामांकन के रूप में प्रस्तावित किया (The Hindu)।
  • इसके बाद लगभग 18 माह तक तकनीकी बैठकों, विभिन्न अधिकार संगठनों (जैसे ICOMOS) के विस्तृत मूल्यांकन और स्थल-निरीक्षण की प्रक्रिया चली (ThePrint)।
  • 7–16 जुलाई 2025 की अवधि में पेरिस के UNESCO मुख्यालय में 47वीं समिति बैठक आयोजित हुई, जिसमें 20 देशों ने भारत के प्रस्ताव पर विचार किया और सहमति जताई ।
  • 59 मिनट की चर्चा में 18 देशों ने भारत के पक्ष में समर्थन दी एवं प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया ।

4. UNESCO द्वारा मूल्यांकन मापदंड

यह नामांकन दो UNESCO मानदंडों के तहत स्वीकार किया गया:

  1. मापदंड (iv) – उत्कृष्ट वास्तुशिल्प और तकनीकी नवाचार के साक्ष्य।
  2. मापदंड (vi) – ऐतिहासिक घटनाओं, जीवंत परंपराओं और संस्कृति के साथ गाड़ा गहरा संबंध (DD India)।

इन गढ़ों ने स्थापत्य, रणनीति और सांस्कृतिक निरंतरता के अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किये, जो उनके वैश्विक महत्व को पुष्ट करते हैं।

5. ऐतिहासिक-भौगोलिक विविधता

5.1 पहाड़ी गढ़

  • सालेहर, शिवनेरी, लोहगड, रायगड, राजगड, गिंजी: सह्याद्री और पूर्वी घाट की पहाड़ियों पर
  • सामरिक ऊँचाई का फायदा, भौगोलिक दबाव और प्राकृतिक सुरक्षा (Wikipedia)

5.2 पहाड़ी-वन गढ़

  • प्रतापगड: घने जंगलों में स्थित, रणनीतिक दृष्टिकोण से मजबूत

5.3 पठार-गिरि गढ़

  • पन्हाला: पठार और पहाड़ी का मिश्रण, यह सामरिक दृष्टि और जल संरक्षण में मददगार था

5.4 तटीय और द्वीपीय गढ़

  • विजयदुर्ग: समुद्र के किनारे, विदेशी आक्रमण से रक्षा के लिए
  • खंडेरी, सुवर्णदुर्ग, सिंहदुर्ग: समुद्री द्वीप गढ़, जो मराठा नौसेना की क्षमता को दर्शाते हैं

6. राजनैतिक समर्थन और मान्यता

  • प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया: “हर भारतीय इस मान्यता से अभिभूत है … मैं सभी से निवेदन करता हूँ कि इन किलों का भ्रमण करें और मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को जानें।” यह मान्यता भारत की विश्व मंच पर बढ़ती सांस्कृतिक प्रतिष्ठा का द्योतक है ।
  • संस्कृति मंत्री तथा महाराष्ट्र सरकार ने भी इस पर गर्व व्यक्त किया ।
  • महाराष्ट्र की 4 सदस्यीय टीम ने पेरिस में तकनीकी दलीलें पेश कीं और UNESCO टीम को गोद लेने में सक्षम बनाई ।

7. भारत की UNESCO में स्थिति

  • भारत कुल 44 विश्व धरोहर स्थलों के साथ दुनिया में 6वें, और आसिया‑प्रशांत क्षेत्र में 2रे स्थान पर है (@mathrubhumi)।
  • 2024-25 चक्र में यह छठा भारतीय भू-धरोहर है—सबसे पहले वर्ष में चारा इडो, असम का माईदाम (Moidams of Charaideo) शामिल हुआ (DD India)।
  • भारत तत्कालीन विश्व धरोहर समिति का भाग (2021‑25) है और भविष्य के लिए 62 स्थल “संभावित सूची” (Tentative List) में शामिल हैं—जो भविष्य के नामांकन के लिए प्रारंभीक आधार है ।

8. संरक्षण, पर्यटन और भावी चुनौतियाँ

8.1 संरक्षण में बढ़ते प्रयास

  • ASI और राज्य पुरातत्व सचिवालय द्वारा अब गढ़ों का विस्तृत संरक्षण, जीर्णोद्धार, सुरक्षा और पर्यटक सुविधा कार्य तेज होगा।
  • क्षेत्रीय पर्यटन योजनाओं में शामिल होने और स्थानीय समुदाय के साथ साझेदारी से संदर्भ, जागरूकता और अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

8.2 चुनौतियाँ

  • बढ़ता पर्यटन दबाव, स्थानीय संरचनात्मक हानि, पर्यावरणीय तनाव और वनीय वनस्पति पर प्रभाव संरक्षा की दृष्टि से गंभीर जोखिम बना सकते हैं।
  • आवश्यक होगा कि इन गढ़ों के आस-पास स्थायी विकास, कचरा प्रबंधन, पर्यटन संतुलन जैसे मुद्दों पर व्यापक कार्य किए जाएं।

“Maratha Military Landscapes of India” की UNESCO सूची में प्रवेश हमारे राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है—यह गढ़ केवल पत्थर नहीं, बल्कि मराठाओं की दृढ़ता, इनोवेशन और समन्वय क्षमता का प्रतीक हैं। यह सिर्फ गौरव नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षित और प्रेरित करने वाला उसूल भी हैं।

इन गढ़ों की यात्रा—चाहे वह शिवनेरी की पहाड़ी या विजयदुर्ग की समुद्र तट से गुजरती चट्टान हो—सिर्फ पर्यटन नहीं, बल्कि भारतीय गौरव और परंपरा के गहरे प्रवास का अनुभव है।

UNESCO की इस मान्यता से हमें और जिम्मेदार बनाना चाहिए—अगर ये गढ़ इतिहास का हिस्सा हैं, तो हमें इन्हें भविष्य की धरोहर भी बनाना है।

1 thought on “Maratha Military Forts of India Added to UNESCO World Heritage List”

  1. मराठा साम्राज्य के इन गढ़ों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता वाकई प्रशंसनीय है। प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं का इस ऐतिहासिक श्रृंखला को यूनेस्को में मान्यता दिलाने का प्रयास सराहनीय है। ये गढ़ न केवल हमारे इतिहास की गाथा सुनाते हैं, बल्कि भारतीय रणनीति और स्थापत्य कला की श्रेष्ठता को भी प्रदर्शित करते हैं। क्या आपको नहीं लगता कि इन गढ़ों की देखभाल और संरक्षण को और अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए? मैं व्यक्तिगत रूप से इन गढ़ों की यात्रा करने का इच्छुक हूं, ताकि इनकी ऐतिहासिक महत्ता को और बेहतर ढंग से समझ सकूं। क्या आपने कभी इनमें से किसी गढ़ की यात्रा की है? अगर हां, तो आपका अनुभव कैसा रहा? यह जानकर अच्छा लगा कि ये गढ़ सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारतीय गौरव का प्रतीक हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top