8th Pay Commission Latest Update: Potential Salary Structure & Hike for Govt Staff (2026)

नमस्ते दोस्तों!

कल्पना कीजिए, सुबह-सुबह अख़बार पढ़ते हुए या मोबाइल पर न्यूज़ फ़ीड स्क्रॉल करते हुए आपकी नज़र एक ऐसी ख़बर पर पड़ती है जो आपके चेहरे पर मुस्कान ला दे। ख़बर है वेतन बढ़ोतरी की! जी हाँ, हम बात कर रहे हैं उस आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की, जिसे लेकर पूरे देश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों के बीच इन दिनों ख़ासा उत्साह और बेसब्री का माहौल है। ये सिर्फ़ एक ख़बर नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आर्थिक तस्वीर बदलने वाला एक बड़ा बदलाव हो सकता है।

अगर आप भी सरकारी नौकरी में हैं, किसी सरकारी कर्मचारी को जानते हैं, या फिर पेंशन पर हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है। आइए, एक्सपर्ट्स की तरह, बिना किसी जटिल शब्दजाल के, समझते हैं कि क्यों है ये इतना चर्चा में, क्या हैं उम्मीदें, और कैसे बदल सकती है आपकी जेब की स्थिति!

क्या है ये “वेतन आयोग”? एक ज़रूरी पृष्ठभूमि

दोस्तों, वेतन आयोग कोई नई बात नहीं है। ये एक ऐसा समिति-तंत्र है जिसे भारत सरकार समय-समय पर गठित करती है। इसका मुख्य काम ये तय करना होता है कि देश भर में केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन, भत्ते, और पेंशन जैसे आर्थिक पहलुओं में क्या बदलाव होने चाहिए। सरल भाषा में कहें तो, ये आयोग सुनिश्चित करता है कि सरकारी कर्मचारियों का वेतन महंगाई और समय की ज़रूरतों के अनुसार हो।

  • पहला पे कमीशन (1946): आज़ादी से पहले!

  • दूसरा (1957), तीसरा (1970), चौथा (1983), पाँचवाँ (1994), छठा (2006): समय के साथ वेतन संरचना को अपडेट करते रहे।

  • सातवाँ पे कमीशन (2016): यही वो आयोग है जिसके तहत अभी हमारे कर्मचारियों को वेतन मिल रहा है। इसने पुरानी ‘पे बैंड’ और ‘ग्रेड पे’ सिस्टम को ख़त्म करके नया ‘पे मैट्रिक्स’ और ‘लेवल’ सिस्टम (लेवल 1 से लेवल 18 तक) लागू किया।

क्यों ज़रूरी है नया आयोग?
सातवाँ आयोग जनवरी 2016 से लागू हुआ था। यानी अब इसको लागू हुए 9 साल से ज़्यादा हो चुके हैं! वित्त मंत्रालय के नियमों के मुताबिक़, आमतौर पर हर 10 साल बाद एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है। ऐसे में, 2024 आते-आते, 2026 में लागू होने वाले आठवें वेतन आयोग की चर्चाएँ तेज़ होना स्वाभाविक है। कर्मचारी संगठन पहले ही इसकी माँग उठाने लगे हैं। उनका तर्क साफ़ है: महंगाई ने क्रय शक्ति को काफी कम कर दिया है, और वर्तमान वेतन संरचना जीवनयापन की बढ़ती लागत के सामने पर्याप्त नहीं रह गई है।

चर्चा क्यों है गर्म? सोशल मीडिया और “ऐतिहासिक वृद्धि” के दावे!

हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ समाचार पोर्टल्स पर एक ख़ास तरह की ख़बरें वायरल हुईं। इनमें दावा किया गया कि आठवाँ वेतन आयोग लागू होने पर लेवल 1 से लेवल 10 तक के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 37% से लेकर 44% तक की भारी-भरकम वृद्धि हो सकती है! इन्हें “ऐतिहासिक” बताया जा रहा था। ज़ाहिर है, ऐसी ख़बरों ने कर्मचारियों के बीच उत्साह की लहर दौड़ा दी और इंतज़ार और बढ़ गया।

ध्यान रखें: अभी तक सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि आठवाँ वेतन आयोग कब गठित होगा या उसकी सिफ़ारिशें क्या होंगी। ये सभी आँकड़े और प्रतिशत अटकलों, अनुमानों या कर्मचारी संघों की माँगों पर आधारित हैं जो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। फिर भी, ये इस बात का संकेत ज़रूर देते हैं कि कर्मचारियों की क्या अपेक्षाएँ हैं।

तो क्या हो सकती है वेतन में बढ़ोतरी? (वर्तमान चर्चाओं के आधार पर)

चलिए, अब उस हिस्से पर आते हैं जिसमें सबकी सबसे ज़्यादा दिलचस्पी है – कितनी बढ़ेगी सैलरी? जैसा कि सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है, बढ़ोतरी कर्मचारी के वर्तमान पे लेवल के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। नीचे दी गई तालिका में हम समझेंगे कि किस लेवल पर वर्तमान बेसिक सैलरी क्या है और आठवें वेतन आयोग के तहत ये कितनी हो सकती है (ये अनुमानित आँकड़े हैं, अंतिम नहीं)।

लेवलवार अनुमानित वेतन बढ़ोतरी:

पे लेवलवर्तमान अनुमानित बेसिक सैलरी (₹)8वें वेतन आयोग के तहत अनुमानित बेसिक सैलरी (₹)अनुमानित वृद्धि (%)अनुमानित मासिक वृद्धि (₹)
लेवल 118,00026,000~44.44%8,000
लेवल 219,90028,000~40.70%8,100
लेवल 321,30030,500~43.19%9,200
लेवल 425,50036,000~41.18%10,500
लेवल 529,20041,000~40.41%11,800
लेवल 635,40049,000~38.42%13,600
लेवल 744,90062,000~38.08%17,100
लेवल 847,60066,000~38.66%18,400
लेवल 953,10073,000~37.48%19,900
लेवल 1056,10078,000~39.04%21,900

(याद रखें: ये आँकड़े सोशल मीडिया पर चर्चित अनुमानों पर आधारित हैं। वास्तविक बढ़ोतरी आयोग की सिफ़ारिशों और सरकार की स्वीकृति पर निर्भर करेगी।)

इस तालिका से क्या समझें?

  1. भारी प्रतिशत वृद्धि: लगभग सभी लेवल्स पर 37% से 44% के बीच बेसिक सैलरी बढ़ने का अनुमान है। ये वाकई एक बड़ी छलांग होगी।

  2. निचले लेवल को ज़्यादा राहत? लेवल 1 और लेवल 3 पर सबसे ज़्यादा प्रतिशत वृद्धि (44% और 43% के करीब) दिख रही है। ये उन जूनियर कर्मचारियों के लिए अच्छी ख़बर हो सकती है जो महंगाई से सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं।

  3. पैसे के हिसाब से बड़ी बढ़ोतरी: प्रतिशत तो महत्वपूर्ण है ही, लेकिन असली फ़र्क तो पैसे की रकम से पड़ता है। लेवल 10 के कर्मचारियों को लगभग ₹22,000 प्रति माह की बढ़ोतरी मिल सकती है, जो एक बहुत बड़ा अंतर लाने वाला है। लेवल 1 को भी ₹8,000 प्रति माह की बढ़ोतरी जीवन स्तर में सुधार ला सकती है।

  4. बेसिक सैलरी पर फोकस: ये बढ़ोतरी बेसिक सैलरी में होने का अनुमान है। याद रखें, कुल सैलरी (ग्रॉस सैलरी) में महत्वपूर्ण हिस्सा विभिन्न भत्तों (जैसे महंगाई भत्ता – DA, घर किराया भत्ता – HRA, ट्रांसपोर्ट भत्ता – TA) का होता है। ये भत्ते आमतौर पर बेसिक सैलरी के प्रतिशत के आधार पर ही लगाए जाते हैं। तो बेसिक सैलरी बढ़ने का सीधा मतलब है कि इन सभी भत्तों में भी स्वत: वृद्धि होगी, जिससे कुल वेतन में बढ़ोतरी का प्रभाव और भी बढ़ जाएगा! ये एक डबल बेनिफिट जैसा होगा।

सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, पेंशनरों के चेहरे पर भी खुशी!

दोस्तों, वेतन आयोग का फ़ायदा सिर्फ़ वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को ही नहीं मिलता। इसका सीधा और बहुत बड़ा प्रभाव पेंशनधारकों पर भी पड़ता है। क्योंकि पेंशन की गणना भी आखिरी बेसिक सैलरी और भत्तों पर आधारित होती है।

  • कैसे मिलेगा फायदा? जब आठवें वेतन आयोग के तहत बेसिक सैलरी बढ़ेगी, तो उसी हिसाब से पेंशन की गणना के लिए आधार (आखिरी वेतन) भी बढ़ जाएगा। इसका मतलब है कि सभी पेंशनधारकों की मासिक पेंसन में भी स्वत: वृद्धि होगी।

  • कितने लोगों को फायदा? अनुमान है कि इससे देश भर के लगभग 65 लाख पेंशनधारकों को फायदा मिलेगा। ये उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए बहुत बड़ी राहत की बात होगी जिनकी आय का मुख्य या एकमात्र स्रोत पेंशन ही है।

  • महंगाई से निपटने में मदद: पेंशनधारकों के लिए भी, बढ़ती महंगाई एक बड़ी चुनौती है। पेंशन में इस तरह की संभावित बढ़ोतरी उन्हें अपना जीवन स्तर बनाए रखने और बढ़ती लागत का सामना करने में मदद करेगी।

कब हो सकता है आयोग का गठन और कब लागू हो सकती है नई सैलरी?

यही सवाल है जो सबके मन में है: “कब तक?”

  1. 10 साल का नियम: जैसा कि हमने शुरू में चर्चा की, वित्त मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, आमतौर पर हर 10 साल बाद एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है।

  2. सातवें आयोग का समय: सातवाँ वेतन आयोग जनवरी 2016 में लागू हुआ था। इस हिसाब से, इसके 10 साल पूरे जनवरी 2026 में होने हैं।

  3. आयोग गठन की सम्भावित समयरेखा:

    • अधिकांश विशेषज्ञों और पूर्व के रुझानों को देखते हुए, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आठवें वेतन आयोग का गठन 2024 के अंत या 2025 की शुरुआत में किया जा सकता है।

    • आयोग को अपना काम पूरा करने, रिपोर्ट तैयार करने और सरकार को सौंपने में लगभग 18 महीने से 2 साल का समय लग सकता है। यानी, उसकी रिपोर्ट 2026 की शुरुआत या मध्य तक आ सकती है।

    • सरकार को रिपोर्ट पर विचार करने, उसे स्वीकार करने (पूरी या आंशिक रूप से) और लागू करने की प्रक्रिया पूरी करने में कुछ और महीने लग सकते हैं।

  4. लागू होने की संभावित तिथि: इस पूरी प्रक्रिया को देखते हुए, अधिकांश आकलन यही कहते हैं कि आठवें वेतन आयोग के तहत नई वेतन संरचना और पेंशन व्यवस्था जनवरी 2026 या उसके आसपास लागू हो सकती है। कई बार इसे अप्रैल 2026 (नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत) से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

  5. अर्धवार्षिक महंगाई भत्ता (DA/DR): इस बीच, वर्तमान सातवें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनरों को महंगाई राहत (DR) हर छह महीने (जनवरी और जुलाई) में संशोधित होता रहता है, जो महंगाई के आधार पर उनकी क्रय शक्ति को कुछ हद तक बनाए रखने में मदद करता है।

महत्वपूर्ण बात: ये समयरेखा अनुमानित है। वास्तविक समय सरकार के फैसले, आयोग के कामकाज की गति और अन्य प्रशासनिक कारकों पर निर्भर करेगी। लेकिन 2026 की शुरुआत इसे लेकर सबसे प्रचलित अनुमान है।

क्यों है ये इतना महत्वपूर्ण? सैलरी बढ़ने के गहरे प्रभाव

सिर्फ़ वेतन पर्ची पर आँकड़े बदलना ही मकसद नहीं है। आठवें वेतन आयोग की संभावित बढ़ोतरी के पीछे गहरे सामाजिक और आर्थिक कारण और प्रभाव हैं:

  1. महंगाई से राहत: ये सबसे बड़ा और सबसे सीधा कारण है। पिछले कई सालों में खाने-पीने की चीज़ों से लेकर पेट्रोल-डीज़ल, घरों के किराए, शिक्षा और स्वास्थ्य तक, हर चीज़ की कीमतें आसमान छू रही हैं। वर्तमान वेतन में इस बढ़ोतरी का सामना करना कर्मचारियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। नया आयोग उम्मीद की किरण है जो क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बहाल करने में मदद कर सकता है। सरल शब्दों में कहें तो, जो सामान पहले ₹100 में आता था, वो अब ₹140 में आता है। वेतन भी उसी अनुपात में बढ़े तो जीवन चलाना आसान होगा।

  2. जीवन स्तर में सुधार: बेहतर वेतन का सीधा असर परिवार के जीवन स्तर पर पड़ता है। इससे:

    • बेहतर खानपान और स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकती हैं।

    • बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर मिल सकते हैं।

    • परिवार छुट्टियों पर जाने या छोटी-मोटी खुशियाँ मनाने का साहस जुटा सकते हैं।

    • घर की सुविधाओं (जैसे बेहतर फ़र्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स) में इजाफ़ा हो सकता है।

  3. वित्तीय सुरक्षा और योजना बनाने की क्षमता: जब मासिक आय बढ़ती है, तो:

    • बचत करने की क्षमता बढ़ती है। लोग अपने भविष्य के लिए, बच्चों की शादी के लिए, या रिटायरमेंट के लिए ज़्यादा बचत कर पाते हैं।

    • लोन लेने की क्षमता बढ़ती है। बैंक या वित्तीय संस्थान आसानी से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन देने को तैयार होते हैं, क्योंकि आपकी चुकाने की क्षमता (Repayment Capacity) बढ़ जाती है। इससे घर खरीदना, कार खरीदना या कोई बिज़नेस शुरू करना आसान हो सकता है।

    • ईएमआई चुकाना आसान हो जाता है। अगर पहले से कोई लोन चल रहा है, तो बढ़ी हुई आय से उसकी ईएमआई का बोझ हल्का महसूस होता है।

  4. मनोबल में वृद्धि: जब कर्मचारी यह महसूस करते हैं कि उनकी मेहनत और योगदान का उचित मूल्यांकन हो रहा है और उनके वित्तीय हितों का ध्यान रखा जा रहा है, तो उनका काम के प्रति मनोबल (Morale) बढ़ता है। यह बढ़ा हुआ मनोबल काम की गुणवत्ता और उत्पादकता पर सकारात्मक असर डाल सकता है।

  5. अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के हाथों में ज़्यादा पैसा आने का मतलब है बाज़ार में माँग (Demand) का बढ़ना। लोग ज़्यादा खरीदारी करेंगे – सामान से लेकर सेवाओं तक। ये बढ़ी हुई माँग उद्योगों और व्यवसायों के लिए अच्छी ख़बर हो सकती है, जिससे आर्थिक गतिविधियाँ तेज़ हो सकती हैं। इसे अर्थशास्त्र में गुणक प्रभाव (Multiplier Effect) कहते हैं।

सरकार के सामने चुनौतियाँ भी हैं

हालाँकि कर्मचारियों के लिए ये ख़ुशी की बात है, लेकिन सरकार के लिए इस तरह की बड़ी वेतन और पेंशन बढ़ोतरी को लागू करना एक बड़ी वित्तीय चुनौती भी है।

  1. बढ़ा हुआ खर्च: लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनरों के वेतन/पेंशन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी का मतलब है सरकारी खज़ने पर भारी अतिरिक्त बोझ। इतने बड़े पैमाने पर वेतन बिल बढ़ाने के लिए सरकार को बजट में काफी ज्यादा आवंटन करना होगा।

  2. संसाधनों का प्रबंधन: इस अतिरिक्त खर्च को पूरा करने के लिए सरकार को:

    • या तो करों में वृद्धि करनी पड़ सकती है (जो आम जनता पर बोझ बढ़ा सकती है),

    • या अन्य क्षेत्रों के विकास बजट में कटौती करनी पड़ सकती है (जैसे बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य, शिक्षा),

    • या फिर ऋण लेकर (Fiscal Deficit बढ़ाकर) इस व्यय को पूरा करना पड़ सकता है, जिसके अपने दीर्घकालिक जोखिम हैं।

  3. अनुबंध कर्मचारी और राज्य सरकारें: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन बढ़ने का दबाव राज्य सरकारों पर भी पड़ता है, क्योंकि वे भी अपने यहाँ वेतन संरचना में समानता बनाए रखना चाहती हैं। इसके अलावा, केंद्र और राज्यों में बड़ी संख्या में काम कर रहे अनुबंध कर्मचारियों (Contractual Employees) की स्थिति और वेतन भी एक चिंता का विषय बना रहता है।

इन चुनौतियों के बावजूद, ये माना जाता है कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए और महंगाई की वास्तविकताओं को देखते हुए, सरकार को आठवें वेतन आयोग को गठित करना ही होगा और एक उचित वेतन संशोधन लागू करना होगा। बस, सवाल यही है कि वृद्धि की दर क्या होगी और कैसे सरकार इसके वित्तीय प्रभावों का प्रबंधन करेगी।

कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति और उम्मीदें

इस लंबे इंतज़ार के दौरान सरकारी कर्मचारियों की क्या स्थिति है?

  • महंगाई का सीधा प्रहार: पिछले कुछ सालों में खासकर कोविड-19 महामारी और उसके बाद वैश्विक घटनाओं के कारण महंगाई ने जोर पकड़ा है। खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें काफी बढ़ी हैं। डीए (महंगाई भत्ता) में वृद्धि होने के बावजूद कई कर्मचारियों को लगता है कि उनकी वास्तविक आय (Real Income – जो मुद्रास्फीति को घटाने के बाद बचती है) स्थिर नहीं रही है या कम हुई है।

  • जीवन स्तर बनाए रखने की जद्दोजहद: मध्यम वर्गीय जीवनशैली की आकांक्षाएँ (जैसे अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, घर, वाहन) पूरी करना वर्तमान वेतन में मुश्किल होता जा रहा है, खासकर महानगरों में। कई कर्मचारी ईएमआई के बोझ तले दबे हुए हैं।

  • बेसब्री से इंतज़ार: ऊपर चर्चा किए गए सोशल मीडिया के अनुमानों ने कर्मचारियों की उम्मीदों को और हवा दी है। वे चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द आयोग का गठन करे और वेतन संरचना में ऐसी बढ़ोतरी करे जो महंगाई की भरपाई करने के साथ-साथ उनके जीवन स्तर में सुधार ला सके। कर्मचारी संघ समय-समय पर सरकार से बातचीत कर रहे हैं और अपनी माँगों को रख रहे हैं।

निष्कर्ष: उम्मीदों और वास्तविकता के बीच का सफर

दोस्तों, आठवाँ वेतन आयोग निश्चित रूप से भारत के करोड़ों सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनरों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण घटना है। सोशल मीडिया पर चर्चित “ऐतिहासिक वृद्धि” के अनुमानों ने इस विषय को और भी गरमा दिया है। हालाँकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि अभी तक कुछ भी अंतिम नहीं है।

  • उम्मीदें ऊँची, लेकिन धैर्य ज़रूरी: कर्मचारियों की उम्मीदें स्वाभाविक रूप से ऊँची हैं, खासकर महंगाई के मौजूदा दौर को देखते हुए। हालांकि, आयोग के गठन से लेकर उसकी रिपोर्ट आने और सरकार द्वारा उसे लागू करने तक एक लंबी प्रक्रिया है। धैर्य बनाए रखना और सही, आधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा करना ही समझदारी होगी।

  • आयोग की भूमिका अहम: आयोग को कर्मचारियों की वास्तविक ज़रूरतों, महंगाई के आँकड़ों, सरकार की वित्तीय स्थिति और समग्र आर्थिक संदर्भ को ध्यान में रखकर संतुलित और व्यावहारिक सिफ़ारिशें करनी होंगी।

  • सरकार की ज़िम्मेदारी: सरकार को कर्मचारियों के हितों और देश की वित्तीय सेहत के बीच सही संतुलन बनाना होगा। समय पर आयोग का गठन और उसकी सिफ़ारिशों पर त्वरित निर्णय लेना महत्वपूर्ण होगा।

  • पेंशनरों को न भूलें: कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनधारकों का हित भी इस प्रक्रिया में बराबर शामिल होना चाहिए।

  • अंतिम परिणाम का इंतज़ार: अभी सब कुछ अनुमानों और चर्चाओं का दौर है। वास्तविक बढ़ोतरी क्या होगी, यह तो आधिकारिक घोषणा होने पर ही स्पष्ट हो पाएगा।

एक बात तो तय है: आठवाँ वेतन आयोग आने वाले समय में सरकारी क्षेत्र और देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला एक बड़ा फैसला होगा। यह न सिर्फ़ लाखों परिवारों की जेब को प्रभावित करेगा, बल्कि पूरे देश की खपत और आर्थिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ेगा।

तो फिलहाल, क्या करें?

  • सही सूत्रों से जुड़े रहें: सरकारी विज्ञप्तियों, वित्त मंत्रालय की वेबसाइट और प्रतिष्ठित समाचार स्रोतों पर नज़र बनाए रखें। सोशल मीडिया पर फैलने वाली हर अफ़वाह पर भरोसा न करें।

  • कर्मचारी संघों से जुड़ें: अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं, तो अपने संबंधित कर्मचारी संघों से जुड़कर रहें। वे सामूहिक रूप से सरकार के साथ बातचीत करते हैं और सही अपडेट दे सकते हैं।

  • वित्तीय योजना बनाएँ: हो सकता है बढ़ोतरी कुछ समय बाद ही मिले। फिलहाल अपने मौजूदा बजट के हिसाब से ही खर्चों की योजना बनाएँ। बढ़ोतरी मिलने पर ही उसके हिसाब से बचत और निवेश की रणनीति अपनाएँ।

  • धैर्य रखें: प्रक्रिया में समय लगेगा, इसलिए धैर्य बनाए रखना ज़रूरी है।

आशा है, ये विस्तृत जानकारी आपको आठवें वेतन आयोग को समझने में मदद करेगी। जैसे ही कोई ठोस और आधिकारिक अपडेट आएगा, हम आप तक ज़रूर पहुँचाएँगे। आपकी टिप्पणियाँ और सवाल हमेशा का स्वागत है – नीचे कमेंट करके ज़रूर बताएँ कि आप इस विषय पर क्या सोचते हैं!

धन्यवाद!

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