Sheikh Hasina Indicted for Crimes Against Humanity

🇧🇩 हटाए गए प्रधानमंत्री शेख हसीना पर सजा: मानवता के खिलाफ पांच आरोप

1. पृष्ठभूमि और राजनीति का उलटफेर

  • शेख हसीना 77 वर्ष की उम्र में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं और उन्होंने कुल 15 वर्षों तक शासन किया। उनका परिवार और विरासत (उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान देश के संस्थापक) उन्हें देश में बेहद प्रभावशाली बनाती है।
  • 2024 की गर्मियों में, छात्र-नेतृत आंदोलन सरकारी नौकरी में कोटा प्रणाली के विरोध में शुरू हुआ। लेकिन यह जल्द ही पूरे देश में व्यापक विरोध दर्ज़ा लेने लगा, और अगस्त को बेशक हसीना को पद छोड़ना पड़ा।

2. हिंसक दमन और बढ़ता संघर्ष

  • सरकार ने विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए: पुलिस, RAB (Rapid Action Battalion), BGB (Border Guard Bangladesh), सेना सभी ने मिलकर सख्त दमन किया। इनमें से कई मामलों में गोलीबारी, बेरहमी से गिरफ्तारियों और यातनाओं जैसे कथित मानवाधिकार उल्लंघन शामिल थे। (The Diplomat)
  • संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष टीम (OHCHR) की रिपोर्ट में दावा किया गया कि 1 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच लगभग 1,400 लोगों की मौत हुई, जिनमें करीब 12–13% बच्चे थे। ज़्यादातर मौत अवैध गोलीबारी की वजह से हुई। (Al Jazeera)
  • इसके अलावा, इस हिंसा के दौरान 11,700 से अधिक लोग हिरासत में लिए गए; कई मामलों में पत्रकारों और चिकित्सा पेशेवरों को भी निशाना बनाया गया। (Dhaka Tribune)

3. मानवता के खिलाफ संभावित अपराध

  • UN रिपोर्ट में कहा गया कि यह आपराधिक घटना “क्राइम्स ऐगेन्स्ट ह्यूमैनिटी” हो सकती है — जिसमें हत्या, उत्पीड़न, जबरन गिरफ्तारी, यातना और हिंसावादी कार्य शामिल हैं। इसे राजनीतिक नेतृत्व और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा योजनाबद्ध माना गया।
  • दर्ज विस्फोटक घटनाओं में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न, बच्चों की बर्बरता, अस्पतालों पर हमला और इंटरनेट व मीडिया नियंत्रण के भी लक्षण दिखे।

4. न्यायिक कार्रवाई और अंतरिम सरकार

  • अगस्त 2024 में हसीना भारत चली गईं। दिसंबर में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से उनका प्रत्यावर्तन (extradition) कराने का प्रयास शुरू किया — लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
  • जून 2025 से अदालत में जांच शुरू हुई — इस ट्रिब्यूनल की स्थापना खुद प्रदूषित शासन के दौरान हेरीत्स वार क्राइम्स के लिए की गई थी। इन मामलों में हसीना, गृह मंत्री असदुज्ज़मान खान और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामुन को आरोपी बनाया गया।

5. पांच गंभीर आरोप — ट्रिब्यूनल की कार्यवाही

  • ** ट्रिब्यूनल-शीर्ष न्यायाधीश गोलम मोर्तुजा मजुमदार** की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने चार जुलाई 2025 को पांच प्रमुख अपराधों की पुष्टि की — जिसमें मानवता के खिलाफ अपराध शामिल हैं।
  • अब्दुल्ला अल-मामुन ने अदालत में स्वीकारोक्ति की और गवाह बनने का प्रस्ताव दिया; हसीना और खान गैरहाज़िर होकर मुकदमों का सामना कर रहे हैं।
  • ट्रिब्यूनल ने अदालत की अवमानना पर भी छह महीने की सजा सुनाई है — यह वही मामला था जिसे लीक ऑडियो में “लाइसेंस टू किल” कहने वाले कथित कथन के आधार पर लाया गया था।

6. लीक ऑडियो और जनता की प्रतिक्रिया

  • BBC द्वारा प्रकाशित रिकॉर्डिंग के मुताबिक़, हसीना ने पुलिस को “लेथल वेपन का उपयोग” (मृत्युदंड की चेतावनी) आदेश दिया था। ट्रिब्यूनल ने इसे सबूत के तौर पर स्वीकार किया।
  • Awami League इसे राजनीतिक साजिश कह रही हैं, “कंगारू अदालत” और “विच हंट” बताते हुए न्यायिक प्रणाली पर सवाल उठा रही है। (theguardian.com)

7. वैश्विक और क्षेत्रीय असर

  • बांग्लादेश—भारत संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ, क्योंकि extradition के सिलसिले में भारत अभी तक कुछ स्पष्ट निर्णय नहीं ले सका। ट्रिब्यूनल की मूलजांच में मानवाधिकार संगठनों और पत्रकारों का समर्थन भी देखा जा रहा है।
  • संयुक्त राष्ट्र प्रमुखों ने सत्यापन की मांग की है, और भारत समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने जांच के लिए ध्यान देने की अपील की है।

8. आगे की न्यायिक संभावनाएँ और चुनौतियाँ

  • ट्रिब्यूनल ने अगली सुनवाई की तारीखें 3 और 4 अगस्त 2025 तय की हैं जिसमें अभियोजन और गवाही शुरू होगी।
  • Awami League को आगामी अप्रैल 2026 के चुनाव से पहले प्रतिबंधित कर दिया गया है — यह राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव का मुख्य संकेत है।
  • विजिलेंस ऑपरेशन — “Operation Devil Hunt” के नाम से — 2025 की शुरुआत से चल रहा है, जिसमें सरकारी एजेंसियों द्वारा समर्थकों की गिरफ्तारी जारी है। (Wikipedia)
  1. देश की युवा पीढ़ी और छात्र वाम आंदोलनों ने लोकतंत्र की दिशा बदल दी — हिंसा की घोर प्रतिक्रिया हुई, जिसकी जांच अभी चल रही है।
  2. अदालतों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में मानवता के खिलाफ अपराधों की गंभीर प्रकृति स्पष्ट हो रही है।
  3. राजनीतिक दृष्टि से बांग्लादेश का भविष्य बेहद अनिश्चित है, क्योंकि एक पुरानी व्यवस्था का पतन और नए संरचना का उदय जारी है।
  4. वैश्विक समुदाय की नजर बांग्लादेश की इस न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकार की स्थिति पर बनी हुई है।

🗓 महत्वपूर्ण प्रवाह सारांश

तारीखघटना
जुलाई–अगस्त 2024छात्र आंदोलन, कोटा विरोध और हिंसक दमन
5 अगस्त 2024हसीना का पद से हटना और भारत के लिए प्रस्थान
12 फरवरी 2025UN OHCHR रिपोर्ट जारी — मृत्यु का आंकड़ा: ~1,400
जुलाई 2025ट्रिब्यूनल ने पाँच गंभीर आरोपाम् में मुकदमा चलाया
अगस्त 2025ट्रायल की प्रारंभिक सुनवाई

इस लेख में हमने सभी प्रमुख घटनाओं को क्रमवार और स्पष्ट ढंग से प्रस्तुत किया है। यदि आप चाहें तो हम प्रत्येक तथ्य या दस्तावेज़ पर गहराई से चर्चा कर सकते हैं, या भविष्य की सुनवाई/राजनीतिक गतिविधियों की अपडेट भी दे सकते हैं।

आशा है यह लेख आपके लिए उपयोगी रहा। आपके सुझाव और टिप्पणियाँ स्वागत हैं।

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